Monday, 25 February 2019

शिवाजी महाराज जयंती उत्सव मनाया

शिवाजी महाराज जयंती उत्सव मनाया

ग्राम- फुकटा, जिला-वर्धा 
22 फरवरी 2019 
शिवाजी महाराज जयंती के उपलक्ष्य में सामाजिक प्रबोधन के कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थ नवयुवक मंडल ग्राम-फुकटा जिला-वर्धा में किया गया। इस कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में मजीदबेग मुगल (प्रसिद्ध अम्बेडकरी विचारक, हिंगणघाट) उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि समाज में एकता निर्माण करने के लिए सदैव प्रयास करते रहना चाहिए। इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि के रूप में राजूभाऊ धोटे (तालुका अध्यक्ष संभाजी बिग्रेड, हिंगणघाट) ने शिवाजी महाराज का चरित्र लोगों के सामने रखा साथ ही उनके द्वारा किसानों के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। 
इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता के रूप में रजनीश कुमार अम्बेडकर (पीएचडी रिसर्च स्कॉलर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा) ने कहा कि शिवाजी ने अपनी 50 वर्ष कि आयु में कई महत्वपूर्ण कार्य किए। जिनसे आज के छात्र-युवाओं को प्रेरणा लेने की जरूरत है। अपनी पढ़ाई-लिखाई करते हुए, सही तथ्यों के साथ जनता को जागरूक करने की ज़िम्मेदारी उठाना होगा। आगे उन्होंने बताया कि आज सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई तीर-धनुष से नहीं बल्कि कलम, दिमाग और वोट की ताकत से हासिल करना होगा। तभी हम सभी को सामाजिक न्याय, हक-अधिकार और मान-सम्मान प्राप्त हो सकता है।  
कार्यक्रम का उद्दघाटन अनिकेत कांबले (तालुका अध्यक्ष समुद्रपुर, भीम आर्मी, वर्धा) ने किया। कार्यक्रम की प्रास्ताविक गाँव के वरिष्ठ नागरिक गौतमरावजी जवादे ने किया। कार्यक्रम का संचालन नितिन बेताल व आभार सिद्धान्त भगत ने व्यक्त किया। इस अवसर पर सिद्धान्त भगत (अध्यक्ष, बहुजन रिपब्लिकन विद्यार्थी मोर्चा, वर्धा), नरेंद्र भगत (उपसरपंच फुकटा), विकास पाटिल, सुनील वावरे, संदीप पाटिल, आयुष पाटिल, यश वनकर, निखिल कांबले, आदिश फुलझेले, वैभव फुलझेले, साहिल वनकर, अक्षयशील कांबले, उमेश कांबले के साथ गाँव के भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे। 
जारीकर्ता        
सिद्धान्त भगत
मो.-9145194574  
अध्यक्ष, बहुजन रिपब्लिकन विद्यार्थी मोर्चा, वर्धा

Wednesday, 26 December 2018

संजलि को न्याय दिलाने के लिए अम्बेडकर स्टूडेंट फोरम की आक्रोश सभा

संजलि को न्याय दिलाने के लिए अम्बेडकर स्टूडेंट फोरम की आक्रोश सभा

Just for Sanjali

वर्धा कैम्पस, 26 दिसम्बर, 2018
आगरा में बर्बरतापूर्वक जिंदा जला दी गई नाबालिग छात्रा संजलि के इंसाफ की आवाज को बुलन्द करने हेतु अम्बेडकर स्टूडेंट्स फोरम के बैनर तले आक्रोश सभा आयोजित हुई। उक्त सभा का आयोजन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय कैम्पस स्थित गांधी हिल पर हुआ। आक्रोश सभा के पूर्व कार्यक्रम में उपस्थित सभी छात्र-छात्राओं ने संजली के फ़ोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। सभा को संबोधित करते हुए उपासना गौतम ने कहा कि इक्कीसवीं सदी में भी भारत में दलितों पर चौतरफा हमले जारी हैं। महिलाओं को यौन हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। संजलि की बर्बर हत्या इसी की एक कड़ी है। सनातनी वर्ण व्यवस्था के समर्थक संविधान को खुली चुनौती देते हुए मनुस्मृति को लागू करना चाहते हैं। आज लोकतंत्र पर खतरनाक ढंग से हमले हो रहे हैं, मनुस्मृति में यकीन रखने वाली शक्तियां ही सत्ता में बनी हुई हैं। हमलावर लगातार बेखौफ होते जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें सत्ता का खुला समर्थन हासिल है। दलितों पर जारी हमलों के खिलाफ ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां और मुख्यधारा की मीडिया शर्मनाक ढंग से चुप हैं। सभा को संबोधित करते हुए शिल्पा भगत ने कहा कि हम रेप कल्चर में जीने को मजबूर हैं। खैरलांजी की घटना की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उस घटना में गांव के बड़ी तादाद में पुरुषों ने एक महिला के साथ बलात्कार को अंजाम दिया और गांव की महिलाओं ने भी उन्हें इसके लिए उकसाया था। यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। भारत में इस रेप कल्चर की प्रकृति कास्टिस्ट भी होती है। यही कारण है कि सवर्ण महिला के साथ जब बलात्कार होता है तो पूरे देश का मुद्दा बनता है किंतु जब किसी दलित महिला के साथ ऐसी घटना होती है तो यह मुद्दा नहीं बनता। न्यायिक प्रक्रिया भी इन्हीं जातिवादी-ब्राह्मणवादी प्रवृतियों से ही संचालित होती है। पलाश किशन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि योगीराज में उत्तर प्रदेश में महिला हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार तमाम मोर्चों पर विफल है। आगे डॉ.अस्मिता राजुरकर ने संजलि का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र के निर्माण में हमारी संवेदनाएं जानने के लिए वास्तविकता को जानना जरूरी है। तभी राष्ट्र संवेदनशील बन पाएगा। दलित फेमिनिस्म क्यों अलग हुआ क्योंकि सवर्ण महिलाओं ने दलित महिलाओं को स्पेस ही नहीं दिया। महिलाओं पर हो रहे रेप की घटनाओं पर कानून के द्वारा लगाम लगाया जाए। इसके अतिरिक्त पन्नालाल धुर्वे, रवि चंद्रा, मुकेश कुमार आदि ने अपनी-अपनी बातें रखीं।  सभा का संचालन शुभांगी शंभरकर ने किया और आभार रजनीश कुमार अम्बेडकर ने किया। उक्त अवसर पर रंजीत कुमार निषाद, चैताली, कुसुम, आशु बौद्ध, रचना, प्रेरणा पाटिल, रविचंद्र, राजेन्द्र कुमार, रिमझिम, ओमप्रकाश बौद्ध, दिलीप गिरहे, वैभव पिम्पलकर, राजन प्रकाश, भंते राकेश आनंद, धीरेन्द्र यादव, पुष्पेंद्र, आरती, इन्द्रश्री बौद्ध, आलोक कुमार बौद्ध, राकेश विश्वकर्मा, कौशल यादव, अनिल कुमार, नरेश गौतम, क्रांति, ब्रजेन्द्र कुमार गौतम, शशिकांत यादव, दिलीप कुमार, सरफ़राज़, आबिद, आशिष कुमार, नीलूराम कोर्राम, कृष्णा निषाद, शशिकांत, धमरत्न, रविन्द्र, वैभव, सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं उपस्थित हुए। 
जय भीम....जय भारत....जय संविधान....हूल जोहार....